इसाई मान्यताओं को फिल्म में कैसे डाला जा सकता है, उसका एक अच्छा उदाहरण है शॉशेंक रिडेम्पशन। इस फिल्म का खलनायक एक जेलर है जो जेल में नायक से बाइबिल पढ़ने के बहाने से कहता है, “आई ऍम द लाइट ऑफ़ दिस वर्ल्ड”। ज्यादातर विचारक मानते हैं कि इसाई रिलिजन में शैतान बन जाने वाला लुसिफ़र Bearer of Light था इसलिए खलनायक इस वाक्य का इस्तेमाल करता है। वैसे ये वाक्य ईसा मसीह का था जो खुद को दुनियां का प्रकाश बताते हैं, इसके जरिये खलनायक खुद को नायक का तारणहार बताना चाहता था। फिल्म का इसाई विषयों से ये सम्बन्ध मेरा ही देखा हुआ नहीं, ये कई विद्वानों का मत है।
फिल्म की कहानी 1947 के दौर के एक बैंकर – एंडी की है, जो अपनी पत्नी और पत्नी के प्रेमी का क़त्ल करने के जुर्म में दो बार उम्र कैद की सजा में शॉशेंक स्टेट पेनीटेंशियरी नाम की जेल में भेजा गया है। वहां उसकी दोस्ती रेड नाम के एक तस्करी की सजा काट रहे व्यक्ति से हो जाती है। यही रेड फिल्म की पूरी कहानी सुना रहा सूत्रधार होता है। जेल में जैसे तैसे जुगाड़ लगा कर एंडी एक छोटी पत्थर तराशने की हथौड़ी जुटा लेता है और उसे एक नायिका (रीटा हैवर्थ) का पोस्टर भी मिल जाता है। एंडी जेलर से भी अपने सम्बन्ध ठीक ठाक रखने की कोशिश करता था।
ऐसा नहीं था कि जेल में उसके सबसे अच्छे सम्बन्ध ही बनते हैं। एक “सिस्टर्स” नाम के गिरोह के लोग, अक्सर एंडी को पीट कर उसका बलात्कार भी करते थे। एक दिन बैंकर की नौकरी कर चुका एंडी देखता है कि जेल के मुख्य गार्ड को टैक्स भरने में दिक्कत हो रही है। वो उसका फॉर्म भरकर गार्ड हेडली का सारा पैसा बचा देता है। कृतज्ञ हेडली बदले में एक दिन “सिस्टर्स” गिरोह के सरदार, बोग्स को पकड़ कर करीब मरने तक पीट देता है। फिर बोग्स को दूसरे जेल में भेज दिया जाता है, इस तरह एंडी को रोज के यौन शोषण और गुंडागर्दी से थोड़ी छूट मिलती है।
धीरे-धीरे एंडी को जेल की लाइब्रेरी का काम मिल जाता है, वहां एक बूढ़े ब्रुक्स की मदद से वो जेल की लाइब्रेरी को भी सुधारता है। असल में जेलर ने ये काम उसे अपने काम से दिया था। अब जेलर और दुसरे गार्ड द्वारा जेल के काम काज से गबन किये पैसे को टैक्स से बचा कर काले से सफ़ेद करवाने का काम करवाने लगता है। बाद में बूढ़ा ब्रुक्स जब बरसों की सजा काट कर छूटता है, तो जेल के बाहर उसे अजीब सा लगता है और आख़िरकार बूढ़ा ब्रुक्स आत्महत्या कर लेता है। एक दिन एंडी लाइब्रेरी को मिले डोनेशन से एक रिकॉर्डिंग लेकर जेल के लाउडस्पीकर सिस्टम पर मैरिज ऑफ़ फिगारो बजा देता है।
इसकी सजा के तौर पर उसे अकेले कालकोठरी में बंद कर देते हैं। एंडी जब अकेले बंद वाली कालकोठरी से निकलता है तो वो रेड को बताता है कि विश्वास या उम्मीद (Hope) वो ताकत है जो उसे और सबको जिन्दा रखती है। रेड उसकी बात पर यकीन नहीं करता। उधर रैंडल स्टीफेंस के नाम से फर्जी अकाउंट बना कर जेलर के काले धन को सफ़ेद करने का एंडी का काम भी जारी रहता है। तबतक जेल में एक कम उम्र का लड़का टॉमी भी आता है जिससे रेड और एंडी की दोस्ती हो जाती है। एंडी इस लड़के की कुछ पढ़ाई में मदद भी करता है।
ये लड़का टॉमी बताता है कि दूसरी किसी जेल में एक कैदी ने उन हत्याओं की जिम्मेदारी कबूली है जिनकी सजा एंडी काट रहा होता है। जब एंडी ये जेलर को बताता है तो जेलर सोचता है एंडी के छूट जाने पर उसकी काली कमाई का भंडाफोड़ हो जाएगा। जेलर भागने की कोशिश का इल्जाम डालकर टॉमी को मरवा देता है, और एंडी को फिर से कालकोठरी में फेंकवा देता है। छूटने पर एंडी कि अगर कभी रेड जेल से छूते तो एक ख़ास जगह जाकर एक डब्बा खोद निकाले जिसे एंडी ने वहां छुपाया है। रेड को लगता है कि टॉमी की मौत से एंडी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और वो कहीं आत्महत्या ना कर ले।
अगली सुबह जब कैदियों की गिनती होती है तो एंडी वहां मौजूद नहीं था। गुस्साया जेलर जब ढूँढने जाता है तो एंडी का कमरा खाली था ! गुस्साया जेलर जब वहीँ पड़े एंडी के नक्काशी वाले पत्थर को हीरोइन के पोस्टर पर दे मारता है। दीवार पर पोस्टर में छेद हो जाता है तो सब पोस्टर हटा के देखते हैं। पोस्टर के पीछे सुरंग थी। कई वर्षों की कैद में एंडी ने एक छोटी सी पत्थर तराशने वाली एक डेढ़ इंच की हथौड़ी के नोक से सुरंग बना ली थी। करीब दो फुटबॉल के मैदान जितनी लम्बी इस सुरंग के रास्ते वो जेलर के कपड़े जूते लेकर भाग गया था। वो इतने पर ही रुका भी नहीं।
जिस रेंडल स्टीफेंस के नकली दस्तावेज से एंडी ने बैंक खाते खुलवाए थे वो भी एंडी ले भागा था। जेलर की सारी काली कमाई निकाल कर उसने दस्तावेज एक अख़बार को भेज दिए। गिरफ़्तारी से बचने के लिए आखिर जेलर खुदखुशी कर लेता है। अंतिम दृश्य में छूटने पर रेड अपना पैरोल तोड़कर एंडी को ढूंढ निकालता है।
फिल्म के निर्देशक Frank Darabont ने कहा था कि इसाई दर्शन के सिद्धांतो वाली फिल्म बनाने का उनका कोई इरादा नहीं था। ये फिल्म ऐसी बनाई नहीं गई है, ये बस ऐसी बन गई है। हम भी आपको ये फिल्म देखने से पहले हिन्दुओं के “नीर-क्षीर विवेक” का सिद्धांत याद कर लेने की सलाह देंगे। बिलकुल फिल्म के नायक एंडी की तरह अपने काम का अपने पास रखिये और बाकी को छोड़ देना सीखिए। जैसे नायक होता तो जेल में है मगर उसे दुसरे कैदियों की संगती में अपराधी नहीं हो जाना होता। वो अपना टैक्स का ज्ञान, लाइब्रेरी सँभालने और जेल के कर्मचारियों का काम करने के बहाने सीखता बढ़ाता रहता है।
ये करीब करीब भगवद्गीता के पांचवे अध्याय का दसवां श्लोक है :-
ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः।
लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा।।
यहाँ भगवान बताते हैं कि जो आसक्तिका त्याग करके कर्म करता है वह पाप से वैसे ही लिप्त नहीं होता जैसे पानी से कमल का पत्ता नहीं भीगता। मेरा काम, या मेरी अभी की दशा है, ये सोचकर जेल के दिन बिता रहे एंडी पर बरसों की कैद का असर ही नहीं हुआ ! एंडी इसी बात पर अड़ा होता है कि “विश्वास” के कारण ही दुनियां कायम है। जैसा कि आगे छठे अध्याय के आठवें श्लोक में कहते हैं :-
ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा कूटस्थो विजितेन्द्रियः।
युक्त इत्युच्यते योगी समलोष्टाश्मकाञ्चनः।।
यहाँ बताया गया है कि जो ज्ञान और विज्ञान से तृप्त है, जितेन्द्रिय और जिसका विश्वास इश्वर में दृढ़ है उसके लिए मिट्टी, पत्थर और स्वर्ण एक से हैं ! ये फिल्म के एंडी जैसा विश्वास (Hope) है जो कालकोठरी में, जेल की लाइब्रेरी के काम में और जेलर की टैक्स चोरी और हेराफेरी के काम में भी कोई फर्क ही नहीं कर रहा होता। उल्टा वो लाइब्रेरी के दान-चंदे से मैरिज ऑफ़ फिगारो लेकर बजा देता है, और उसका विश्वास इतना प्रबल था कि ये संगीत सुनकर बीमार कैदी भी बिस्तर से उठ बैठते हैं। बुरे को भी अच्छा कर देती ये विश्वास की शक्ति है।
ये सब हो क्यों रहा है, या कैसे हो रहा है ये समझने के लिए काफी आगे पन्द्रहवें अध्याय में जाना होगा। यहाँ पहले से छठे श्लोक के बीच बताया गया है कि संसार एक उल्टे पेड़ के जैसी है। इसकी जड़ें परमात्मा की ओर हैं, तना ब्रह्मा स्वरुप, और वेद इसके पत्तों जैसे हैं। यानी जिन फलों को सबसे ऊपर का, उत्तम समझा जाता है वो असल में निम्न ही हैं। ये उल्टा होना शायद एंडी को आसानी से इसलिए दिख गया क्योंकि वो जेल में था। ऐसी जेल में जहाँ से निकलकर बूढ़े ब्रुक्स को आम दुनियां ही इतनी उल्टी लगी कि वो आत्महत्या कर लेता है। रेड को भी बाहर आना असहज कर देता है।
बाकी फिल्म देखिये कुछ खुद पढ़कर सीखिए ये नर्सरी के लेवल का है (हमें उतना ही आता था) और पीएचडी के स्तर के लिए आपको खुद पढ़ना पड़ेगा, ये तो याद ही होगा?
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शॉशेंक रिडेम्पशन और भगवद्गीता
