वैज्ञानिक सोच और धर्म

“तुम्हारी सोच वैज्ञानिक नहीं है!”—यह जुमला पिछड़ी और विदेशी सोच के लोग अक्सर उछालते हुए मिल जाते हैं। लेकिन क्या […]

धुरंधर का सामना!

पहले तो टीजर, ट्रेलर, गाने इत्यादि आते हैं और हम पहले ही ये मानकर बैठे होते हैं कि किसी पुराने […]

दिवस 09

संजय उवाच एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत। सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्।।1.24। भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्। उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति।।1.25।। तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितृ़नथ पितामहान्। आचार्यान्मातुलान्भ्रातृ़न्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा।।1.26।। […]

दिवस 08

अथ व्यवस्थितान् दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्कपिध्वजः। प्रवृत्ते शस्त्रसंपाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः।।1.20।। अर्जुन उवाच हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते। सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत।।1.21।। यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्। […]