जब मनु भाकर भगवद्गीता की बात करती हैं!
“पढ़िए गीता; बनिए सीता; फिर इन सबमें लगा पलीता; किसी मूर्ख की हो परिणीता; निज घरबार बसाइए।“ ऐसा हम नहीं […]
“पढ़िए गीता; बनिए सीता; फिर इन सबमें लगा पलीता; किसी मूर्ख की हो परिणीता; निज घरबार बसाइए।“ ऐसा हम नहीं […]
किसी खिलाड़ी के लिए अभ्यास कितना उबाऊ होता होगा? मान लीजिये क्रिकेट ही खेलता है तो हर दिन सुबह उठकर […]
कहानी के नायक भुवन सोम एक विधुर हैं और रेलवे के बड़े अधिकारी। इन बातों पर आपका ध्यान इसलिए चला […]
एक कुर्दी फिल्म है “टर्टल्स कैन फ्लाई” जिसका नाम ही अजीब लगता है। काफी चर्चित रही इस फिल्म की कहानी […]
कहानी बस इतनी सी थी कि एक व्यक्ति पौ फटने से पहले ही (यानि 3-4 बजे सुबह) एक गठरी सी […]
पाली भाषा में गौतम बुद्ध के जो महत्वपूर्ण सन्देश आते हैं, “अदित्तपरियाय सूक्त” उनमें से एक है। मोटे तौर पर […]
सत्यजित रे ने 1964 में एक छोटी सी, बारह मिनट की फिल्म बनायीं थी, जिसका नाम था “टू”। अंग्रेजी नाम […]
“पंडित लीलाधर चौबे की जबान में जादू था।“ इसी वाक्य से प्रेमचंद की “मंत्र” नाम की कहानी शुरू होती है। […]
“तो क्या झूठ बोलना अच्छी बात है?” “नहीं, अच्छी बात तो नहीं”, मैंने समझाने की कोशिश करते हुए कहा। “असल […]
“वाव, इतने सारे लोग!” टीवी पर नजर आ रही लाखों लोगों की भीड़ को देखकर बच्चे ने कहा, “क्या इन […]