सत्ता-सामर्थ्य और कामनाओं का जाल
राष्ट्रपति चुनाव, पत्रकारिता और उससे जुड़ी राजनीती और षड्यंत्रों के किस्म-किस्म के दांव-पेंच देखने हों तो “आल द प्रेसिडेंट्स मेन” […]
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सुबोध घोष की कहानी “जातुगृह” पर बांग्ला फिल्म तो 1965 में बन चुकी थी। उसी कहानी को आधार बनाकर गुलज़ार […]